राजधानी रांची में सुर, साज और आवाज़ का एक बेहद ही शानदार और यादगार संगम देखने को मिला। रागा एंटरटेनमेंट के तत्वावधान में आयोजित प्रतिष्ठित संगीत प्रतियोगिता “रांची आइडल” का ग्रैंड फिनाले धूमधाम से संपन्न हुआ, जहां प्रतिभागियों ने अपनी जादुई गायकी से समां बांध दिया। अगस्त महीने से शुरू हुए सुरों के इस महासंग्राम के अंतिम चरण में सुपर सीनियर, सीनियर और जूनियर कैटेगरी के फाइनलिस्टों ने अपनी बेहतरीन प्रस्तुतियों से न सिर्फ दर्शकों का दिल जीता, बल्कि निर्णायकों को भी मंत्रमुग्ध कर दिया। ट्रॉफी अपने नाम करने की होड़ में हर प्रतिभागी ने सुरों के उतार-चढ़ाव और अपने अनोखे अंदाज से मंच पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।
इस कड़े मुकाबले में गायकी की हर बारीकी को परखने के लिए एक बेहद अनुभवी निर्णायक मंडल मौजूद था। सारेगामा फेम दयाल गोस्वामी, ज़ी म्यूजिक कंपनी के म्यूजिक प्रोड्यूसर असलम खान, वंदना उपाध्याय और प्रिया वर्मा ने बतौर जज प्रतिभागियों के सुर, ताल, आवाज़ और मंचीय प्रस्तुति का गहन मूल्यांकन किया। ग्रैंड फिनाले के मंच पर एक के बाद एक हुई शानदार प्रस्तुतियों ने पूरे माहौल को संगीतमय बना दिया, जहां प्रतिभागियों का संगीत के प्रति जुनून और आत्मविश्वास साफ झलक रहा था।
कड़ी प्रतिस्पर्धा के बाद आखिरकार तीनों श्रेणियों के विजेताओं के नाम का ऐलान कर दिया गया। सुपर सीनियर कैटेगरी में ज्ञानेश ने अपने सुरों का परचम लहराते हुए विनर का खिताब अपने नाम किया, जबकि सीनियर कैटेगरी में आकाश कुमार वर्मा और जूनियर कैटेगरी में आलोक कुमार चैंपियन बने। तीनों विजेताओं को पुरस्कार स्वरूप 25-25 हजार रुपये के चेक प्रदान किए गए। वहीं, फर्स्ट रनर-अप के रूप में सुपर सीनियर में सुमन सुंदर प्रसाद, सीनियर में रोनिक किशन और जूनियर में अरुण कुमार ने बाजी मारी, जिन्हें 15-15 हजार रुपये के चेक दिए गए। इसके अलावा सेकंड रनर-अप का खिताब सुपर सीनियर में अमर कुमार सहाय, सीनियर में जाकिर और जूनियर में कुमारी दिव्या के नाम रहा, जिन्हें 10-10 हजार रुपये के इनाम से नवाजा गया।
रांची आइडल के इस बेहद सफल और भव्य आयोजन के पीछे सेक्रेटरी मुशर्रफ़ सऊद और ज्वाइंट सेक्रेटरी प्रकाश मोहन की अहम भूमिका रही। आयोजकों ने बताया कि इस संगीतमय सफर का मुख्य उद्देश्य रांची और पूरे झारखंड में छिपी हुई प्रतिभाओं को एक ऐसा मंच प्रदान करना है, जहां से वे संगीत की दुनिया में अपनी एक अलग पहचान बना सकें। ग्रैंड फिनाले में सभी कलाकारों के शानदार प्रदर्शन ने यह साबित कर दिया है कि झारखंड की माटी में संगीत रचता-बसता है और यहां प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। संगीत प्रेमियों के लिए यह शाम एक ऐसी खूबसूरत याद बन गई, जिसमें मेहनत, कला और सुरों का बेजोड़ संगम था।











