झारखंड पुलिस विभाग में लंबे समय से प्रोन्नति की प्रक्रिया अधर में लटकी हुई है, जिसके कारण सहायक अवर निरीक्षक (ASI) से पुलिस अवर निरीक्षक (SI), सब-इंस्पेक्टर से पुलिस इंस्पेक्टर और इंस्पेक्टर से डीएसपी रैंक तक के पदोन्नति मामलों की फाइलें विभिन्न स्तरों पर धूल फांक रही हैं। इस प्रशासनिक देरी और विभागीय उदासीनता के चलते राज्यभर के पुलिसकर्मियों में भारी नाराजगी और निराशा का माहौल बन गया है।
विशेष रूप से उन पुलिस अधिकारियों और जवानों का मनोबल टूट रहा है जो पिछले 10 से अधिक वर्षों से राज्य के दुर्गम एवं घोर नक्सल प्रभावित जिलों में अपनी जान जोखिम में डालकर लगातार सेवाएं दे रहे हैं। नियमानुसार निश्चित समयावधि पूरी होने के बाद पदोन्नति और सामान्य क्षेत्रों में स्थानांतरण का लाभ मिलना चाहिए था, लेकिन प्रक्रिया रुकने से वे एक ही पद और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में लंबे समय से तैनात रहने को मजबूर हैं।
समय पर डीपीसी (विभागीय पदोन्नति समिति) की बैठकें न होने और प्रशासनिक अड़चनों के कारण पुलिस महकमे के कई संवर्गों में पद रिक्त पड़े हैं, जबकि योग्य व अनुभवी अधिकारी प्रमोशन की बाट जोहते हुए सेवानिवृत्ति के करीब पहुंच रहे हैं। फील्ड में विपरीत परिस्थितियों में दिन-रात कानून व्यवस्था और नक्सल विरोधी अभियानों में जुटे पुलिस बल के बीच गहराता यह असंतोष विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है, जिसके चलते अब शासन स्तर से इस मामले में त्वरित हस्तक्षेप और लंबित फाइलों के तत्काल निष्पादन की मांग जोर पकड़ने लगी है।











