रांची के वाईबीएन विश्वविद्यालय में संगीत एवं प्रदर्शन कला विभाग द्वारा IQAC के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला के पहले दिन भारतीय संस्कृति, संगीत और साहित्य के विविध आयामों पर गहन विचार-विमर्श हुआ। “श्रावण मास की सांस्कृतिक विरासत: साहित्य, कला एवं संगीत” विषय पर आधारित इस विशेष कार्यक्रम का आयोजन द अंजुरम ग्रैंड ऑडिटोरियम में किया गया। दीप प्रज्ज्वलन, शिव वंदना और कथक नृत्य की मोहक प्रस्तुति के साथ शुरू हुए इस सत्र में विभागाध्यक्ष सह संयोजक डॉ. रूपा सिन्हा और छात्रा मधुश्री द्वारा लिखित पुस्तक “वाइब्रेशनल हीलिंग” का विमोचन भी संपन्न हुआ।
तकनीकी सत्र के दौरान मल्हार, कजरी, झूला और सावन के पारंपरिक गीतों पर शास्त्रीय गायन की बारीकियों को साझा किया गया। मुख्य अतिथि पद्मश्री मधु मंसूरी ने सावन और झारखंड की लोक संस्कृति के गहरे संबंधों पर प्रकाश डाला, जबकि वाराणसी से पधारे वेदविभूषण आचार्य हिसाथ मिश्रा ने सामवेदीय संगीत परंपरा से श्रोताओं को परिचित कराया। वहीं, कुलपति डॉ. सत्यदेव पोद्दार, SIRD रांची के राजीव रंजन, डॉ. मधुमंती, डॉ. शीतल उरांव, डॉ. योगेश महतो और डॉ. आरती गुप्ता ने वर्षा ऋतु, नागपुरी लोक संगीत और साहित्य-संगीत के अंतर्संबंधों पर अपने विचार साझा किए।
सत्र के समानांतर आयोजित कला प्रदर्शनी और प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने सावन, प्रकृति और भारतीय परंपराओं पर आधारित उत्कृष्ट कलाकृतियों का प्रदर्शन किया, जिसके विजेताओं को नकद पुरस्कारों से सम्मानित किया जाएगा। चेयरमैन श्री रामजी यादव, कुलपति डॉ. सत्यदेव पोद्दार और सीएमडी डॉ. अंकिता यादव के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यशाला के दूसरे दिन ‘सावन महोत्सव—रंग, राग, रौनक’ के तहत संतूर वादन, विशेष व्याख्यान, पारंपरिक खेल, नाटक, नृत्य और मेहंदी प्रतियोगिता जैसे कई रंगारंग कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।













