तेहरान / नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में फंसे सैकड़ों भारतीय नाविकों सहित 11,000 से अधिक समुद्री कर्मियों के लिए बहुत बड़ी और राहत भरी खबर आई है। संयुक्त राष्ट्र (UN) की संस्था इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गनाइजेशन (IMO) ने इस बेहद संवेदनशील जलमार्ग में फंसे नाविकों और जहाजों को सुरक्षित बाहर निकालने का महा-अभियान (मेगा ऑपरेशन) शुरू कर दिया है।
यह कदम हाल ही में ईरान और अमेरिका के बीच हुए ‘स्विट्जरलैंड समझौते’ के बाद उठाया गया है, जिसने ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल युद्ध को रोकने में अहम भूमिका निभाई है।
सुरक्षा गारंटी मिलने के बाद शुरू हुआ ऑपरेशन
IMO के सेक्रेटरी-जनरल आर्सेनियो डोमिंग्वेज़ ने मंगलवार को आधिकारिक बयान जारी कर इस रेस्क्यू ऑपरेशन की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि यह अभियान ईरान, ओमान, क्षेत्र के सभी तटीय देशों, अमेरिका और वैश्विक समुद्री उद्योग के साथ मिलकर आपसी समन्वय से चलाया जा रहा है।
डोमिंग्वेज़ ने बताया, “हमने इस ऑपरेशन को सुरक्षित अंजाम देने के लिए सभी जरूरी सुरक्षा गारंटियां हासिल कर ली हैं और सुरक्षित नेविगेशन (जहाजों के आवागमन) की शर्तों की गहन जांच-पड़ताल पूरी हो चुकी है।”
क्यों बंद था होर्मुज स्ट्रेट?
गौरतलब है कि इसी साल 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका-इजरायल युद्ध शुरू होने के बाद तेहरान प्रशासन ने जवाबी कार्रवाई के तहत इस रणनीतिक जलडमरूमध्य को पूरी तरह बंद कर दिया था। इस वजह से दुनिया भर के सैकड़ों कमर्शियल जहाज और तेल टैंकर पिछले 2-3 महीनों से वहीं के वहीं फंस गए थे। इन जहाजों पर बड़ी संख्या में भारतीय नाविक भी मौजूद हैं, जो लंबे समय से इस संकट के टलने का इंतजार कर रहे थे।
ट्रैफिक ने बनाया रिकॉर्ड, चरणों में होगी जहाजों की निकासी
पिछले हफ्ते दोनों देशों के बीच हुए समझौते के बाद से ही इस समुद्री रास्ते पर जहाजों की आवाजाही अचानक बढ़ गई है। शिपिंग इंटेलिजेंस एजेंसी ‘केप्लर’ की रिपोर्ट के मुताबिक, सोमवार को कम से कम 36 कमर्शियल जहाज इस स्ट्रेट से गुजरे, जो युद्ध की शुरुआत के बाद से ट्रैफिक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड है।
ओमान के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, जहाजों की सुरक्षा को देखते हुए यह निकासी बेहद नियंत्रित और धीरे-धीरे (चरणबद्ध तरीके से) की जाएगी। मंत्रालय ने आगाह किया है कि वर्तमान परिस्थितियों में जहाजों के आपस में टकराने का जोखिम बहुत ज्यादा है, इसलिए ट्रैफिक को संभालते हुए ही रेस्क्यू पूरा किया जाएगा। इस बीच डेनमार्क ने भी फ्रांस और ब्रिटेन के उस अंतरराष्ट्रीय समुद्री मिशन में शामिल होने की घोषणा की है, जिसका मकसद इस अहम वैश्विक व्यापार मार्ग को पूरी तरह सुचारू बनाना है।
अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग पर टोल वसूलने नहीं देगा अमेरिका
दूसरी तरफ, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो मंगलवार को संयुक्त अरब अमीरात (UAE) पहुंचे। वहां उन्होंने कड़े शब्दों में दोहराया कि अमेरिका किसी भी अंतिम समझौते के तहत ईरान को होर्मुज स्ट्रेट में टोल या टैक्स वसूलने की इजाजत नहीं देगा। रुबियो ने साफ किया, “यह एक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग है, और दुनिया के किसी भी देश को अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्ते पर टोल या फीस वसूलने का अधिकार नहीं है। मुझे पूरा भरोसा है कि इस क्षेत्र के सभी देश हमारी इस बात से सहमत होंगे।”