दुमका जिले के रानीश्वर प्रखंड अंतर्गत रांगालिया पंचायत के मसानपाड़ा गांव में विकास के दावों की एक दर्दनाक तस्वीर सामने आई है। गांव तक पक्की सड़क न होने के कारण एक बीमार ग्रामीण को समय पर घर नहीं पहुंचाया जा सका और रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया। मसानपाड़ा निवासी सुनील किस्कू की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया था। अस्पताल में डॉक्टरों द्वारा जवाब दिए जाने के बाद परिजन उन्हें एंबुलेंस से वापस घर ला रहे थे।
गांव की ओर जाने वाला कच्चा रास्ता बारिश के कारण भारी कीचड़ से भरा हुआ था, जिसके चलते एंबुलेंस चालक ने वाहन को गांव के बाहर ही रोक दिया। मजबूर परिजनों और ग्रामीणों ने सुनील किस्कू को खटिया पर लिटाया और पैदल ही घर की ओर ले जाने लगे। दुर्भाग्यवश, घर पहुंचने से पहले ही रास्ते में सुनील किस्कू की सांसें थम गईं।
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, मसानजोर डैम बनने के दौरान विस्थापित हुए परिवारों को इस इलाके में बसाया गया था, लेकिन दशकों बाद भी यहां पक्की सड़क की सुविधा नहीं पहुंच सकी। विधानसभा चुनाव से पहले ग्रामीणों ने सड़क निर्माण की मांग को लेकर चुनाव बहिष्कार का एलान किया था। उस दौरान ग्रामीण कार्य विभाग के कार्यपालक अभियंता, बीडीओ और मुखिया सहित प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर जल्द सड़क बनवाने का ठोस आश्वासन दिया था। इसके बाद विभाग द्वारा सड़क का सर्वे कराकर डीपीआर स्वीकृति के लिए रांची भी भेजा गया, लेकिन फाइलें अब तक अटकी हुई हैं। प्रशासनिक लापरवाही और जमीनी उपेक्षा के कारण बरसात में ग्रामीणों का पैदल चलना भी दूभर हो गया है, जिसका खामियाजा अब लोगों को अपनी जान देकर भुगतना पड़ रहा है।









