राजधानी रांची के मेन रोड स्थित राज हॉस्पिटल में इलाज में गंभीर लापरवाही का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक गर्भवती महिला की ब्लड रिपोर्ट ही बदल गई। ध्रुवा निवासी 7 माह की गर्भवती श्रुति कुमारी, जो डॉ. पुष्पा सिन्हा की देखरेख में अपना इलाज करा रही थीं, इस घटना से गहरे सदमे में हैं। विवाद तब शुरू हुआ जब 12 मई को हुई जांच में महिला का ब्लड ग्रुप ‘ओ पॉजिटिव’ बताया गया, लेकिन मात्र 10 दिनों के भीतर अस्पताल ने उन्हें ‘बी पॉजिटिव’ की रिपोर्ट थमा दी।

इस गंभीर चूक से आक्रोशित परिजनों ने अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया। मरीज के पति ने अस्पताल प्रबंधन पर जानलेवा लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि बार-बार ब्लड सैंपल लेना सिर्फ एक दिखावा है, जिससे मरीजों की जान जोखिम में डाली जा रही है। उन्होंने इलाज की पारदर्शिता और गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठाते हुए अस्पताल प्रशासन से स्पष्ट जवाब की मांग की। स्थिति यह रही कि मामले पर पक्ष जानने के लिए जब अस्पताल के जीएम अरविंद कुमार से संपर्क किया गया, तो उन्होंने कोई भी प्रतिक्रिया देने से साफ इनकार कर दिया।
रांची के अस्पतालों में लापरवाही की यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी इलाज में कोताही, अनावश्यक बिल और मरीजों के प्रति संवेदनहीनता की खबरें सुर्खियां बनती रही हैं। इस बार की घटना ने एक बार फिर स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से इस मामले की निष्पक्ष जांच करने और दोषी कर्मियों पर सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। उनका कहना है कि आखिर कब तक अस्पताल प्रबंधन “मानवीय भूल” की आड़ में मरीजों की जान से खिलवाड़ करते रहेंगे।
