राँची स्थित वाईबीएन विश्वविद्यालय के संगीत एवं प्रदर्शन कला विभाग द्वारा आईक्यूएसी के सहयोग से श्रावण मास की सांस्कृतिक विरासत, साहित्य, कला एवं संगीत विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला 25 अगस्त को धूमधाम से संपन्न हो गई। ‘द अंजुरम ग्रैंड ऑडिटोरियम’ में आयोजित इस भव्य समागम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन, भावपूर्ण शिव वंदना तथा कथक स्वागत नृत्य के साथ हुआ। विश्वविद्यालय के चेयरमैन श्री रामजी यादव, कुलपति डॉ. सत्यदेव पोद्दार और सीएमडी डॉ. अंकिता यादव के मुख्य संरक्षण में आयोजित इस कार्यक्रम का स्वागत भाषण संयोजिका एवं विभागाध्यक्ष डॉ. रूपा सिन्हा ने प्रस्तुत किया। इस अवसर पर डॉ. रूपा सिन्हा और संगीत छात्रा मधुश्री द्वारा लिखित पुस्तक ‘वाइब्रेशनल हीलिंग’ का विमोचन भी गणमान्य अतिथियों द्वारा किया गया।
कार्यशाला के तकनीकी सत्रों के दौरान मल्हार, कजरी, झूला और पारंपरिक सावन गीतों पर केंद्रित शास्त्रीय गायन की विशेष कक्षाएं आयोजित की गईं, जिसमें डॉ. रूपा सिन्हा और डॉ. शीतल उरांव ने प्रशिक्षुओं का मार्गदर्शन किया। मुख्य अतिथि पद्मश्री मधु मंसूरी ने सावन की सांस्कृतिक महत्ता को रेखांकित किया, वहीं डॉ. मधुमंती ने सावन के जैव-सांस्कृतिक पहलुओं पर विचार रखे। दूसरे दिन प्रख्यात संतूर वादक श्री चिरादिप सरकार ने ‘द वॉयस ऑफ सावन’ शीर्षक से मंत्रमुग्ध कर देने वाली सांगीतिक प्रस्तुति दी। साथ ही राँची विश्वविद्यालय की पूर्व संकायाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) सरस्वती मिश्रा ने सावन मास के सौंदर्यशास्त्रीय महत्व पर सारगर्भित व्याख्यान दिया।
समारोह के अंतिम प्रहर में ‘सावन महोत्सव – रंग, राग, रौनक’ का विशेष आयोजन हुआ, जिसमें पारंपरिक खेल, नाटक, नृत्य, मेहंदी और कला प्रतियोगिताओं ने समां बांध दिया। मिस पिंकी एवं सुश्री निकिता तिवारी के संचालन में आयोजित इस महोत्सव में विभिन्न विद्यालयों, महाविद्यालयों एवं सरकारी विभागों के प्रतिभागियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। विश्वविद्यालय प्रबंधन और आयोजन समिति ने इसे सांस्कृतिक चेतना, लोक परंपराओं और कला-साहित्य के संवर्धन की दिशा में एक ऐतिहासिक और सफल प्रयास बताया।














