झारखंड आंदोलन के महानायक और आदिवासियों के हक-अधिकारों की लड़ाई लड़ने वाले ‘दिशोम गुरु’ शिबू सोरेन के सम्मान में गुमला के सिलम चौक का नाम बदलने की मांग तेज हो गई है। आदिवासी समाज और स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों ने गुमला के उपायुक्त (DC) को एक ज्ञापन सौंपकर सिलम चौक का नामकरण ‘शिबू सोरेन चौक’ करने का आग्रह किया है।
यह चौक रिंग रोड और नेशनल हाईवे (NH) का मिलन स्थल होने के कारण बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।रिंग रोड और राष्ट्रीय राजमार्ग के मिलन स्थल पर स्थित ऐतिहासिक सिलम चौक का नाम शिबू सोरेन के नाम पर रखना पूरी तरह से जनभावनाओं के अनुरूप होगा। मांगकर्ताओं के अनुसार, शिबू सोरेन का संघर्ष केवल झारखंड तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वे पूरे देश में आदिवासी अस्मिता, सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक न्याय के बड़े प्रतीक हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि गुमला जिले में आदिवासी समाज के कई महान नेताओं के ऐतिहासिक योगदान को अब तक वह उचित सम्मान नहीं मिल सका है जिसके वे हकदार थे, यह कदम उसी दिशा में एक शुरुआत होगी।
उपायुक्त को ज्ञापन सौंपने के दौरान मुख्य रूप से नेल्सन भगत, सुबोध उरांव, सोमनाथ उरांव, रोशन साहू, रामचंद्र उरांव और सोनू साहू समेत कई लोग उपस्थित थे।गुमला जिले के प्रसिद्ध सिलम चौक का नाम बदलने की मांग ने अब तूल पकड़ लिया है। इस सिलसिले में स्थानीय आदिवासी समाज और प्रबुद्ध नागरिकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने गुमला के उपायुक्त (DC) से मुलाकात की और उन्हें एक औपचारिक ज्ञापन सौंपा। उपायुक्त को सौंपे गए ज्ञापन में इस बात पर विशेष जोर दिया गया है कि सिलम चौक केवल एक आम चौराहा नहीं है, बल्कि यह रिंग रोड और राष्ट्रीय राजमार्ग के मिलन स्थल पर स्थित एक बेहद महत्वपूर्ण और रणनीतिक केंद्र है।
इस चौक का नामकरण ‘दिशोम गुरु’ शिबू सोरेन के नाम पर ‘शिबू सोरेन चौक’ किया जाना स्थानीय जनता की आकांक्षाओं और भावनाओं के बिल्कुल अनुकूल होगा।मांगकर्ताओं ने शिबू सोरेन के ऐतिहासिक योगदान को याद करते हुए कहा कि झारखंड राज्य के गठन, आदिवासियों की सांस्कृतिक पहचान को अक्षुण्ण रखने और उनके अधिकारों व सम्मान की रक्षा के लिए उनका लंबा संघर्ष अतुलनीय रहा है। उनका योगदान सिर्फ राज्य स्तर तक ही सीमित नहीं है, बल्कि वे आज पूरे देश में आदिवासी अस्मिता और सामाजिक न्याय के एक बड़े प्रतीक के रूप में जाने जाते हैं।ज्ञापन में इस बात पर भी खेद जताया गया कि गुमला जिले के इतिहास में आदिवासी समाज के कई महान नेताओं ने अपना ऐतिहासिक योगदान दिया, लेकिन उन्हें आज तक वह उचित सम्मान और पहचान नहीं मिल पाई जिसके वे हकदार थे। सिलम चौक का नाम शिबू सोरेन के नाम पर रखना न केवल उन्हें एक सच्ची श्रद्धांजलि होगी, बल्कि यह क्षेत्र के गौरव को भी बढ़ाएगा।
इस महत्वपूर्ण मौके पर ज्ञापन सौंपने के दौरान मुख्य रूप से नेल्सन भगत, सुबोध उरांव, सोमनाथ उरांव, रोशन साहू, रामचंद्र उरांव और सोनू साहू सहित कई अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे।