राजधानी रांची के सदर अस्पताल में राज्य के जाने-माने गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. जयंत कुमार घोष और उनकी मेडिकल टीम ने एक मरीज की जान बचाकर चिकित्सा क्षेत्र में मिसाल पेश की है। डॉक्टरों ने बेहद जटिल स्थिति में पहुंचे एक मरीज की पित्त की नली से चार साल पुराना फंसा हुआ स्टेंट, करीब 70 से 80 पथरी और जमा हुआ कीचड़ बिना किसी चीर-फाड़ के सफलतापूर्वक बाहर निकाला।
मरीज चार साल पहले पेट दर्द की समस्या लेकर पहुंचा था, जहां ईआरसीपी (ERCP) तकनीक से उसकी पित्त की नली की पथरी निकालकर एक स्टेंट डाला गया था। नियमानुसार इस स्टेंट को एक से दो महीने के भीतर निकलवाना जरूरी था, लेकिन निजी कारणों से मरीज चार वर्षों तक इसे नहीं निकलवा सका। समय बीतने के साथ स्थिति बेहद गंभीर हो गई और असहनीय पेट दर्द के साथ मरीज का पीलिया (जॉन्डिस) खतरनाक स्तर तक बढ़ गया।
गंभीर हालत में मरीज ने सदर अस्पताल में डॉ. जयंत कुमार घोष से संपर्क किया। जांच में चार साल पुराने स्टेंट और भारी मात्रा में पथरी फंसे होने की पुष्टि हुई। इसके बाद डॉ. घोष ने अपनी विशेषज्ञता और आधुनिक ईआरसीपी सह दूरबीन विधि का इस्तेमाल करते हुए इस बेहद जोखिम भरे मामले को बिना किसी बड़े ऑपरेशन के सुलझा लिया।
इस ऐतिहासिक प्रक्रिया को सफल बनाने में डॉ. वसुधा, डॉ. नीरज, एंडोस्कोपी तकनीशियन शेषनाथ यादव, सिस्टर श्वेता, सिस्टर सरिता के साथ ओटी तकनीशियन मोहित और सुरेश ने अहम भूमिका निभाई। इस जटिल उपचार को मुकाम तक पहुंचाने में सदर अस्पताल के ओटी इंचार्ज डॉ. अखिलेश झा, उपाधीक्षक डॉ. बिमलेश सिंह और सिविल सर्जन डॉ. अमरेंद्र प्रसाद का प्रशासनिक व चिकित्सीय सहयोग सराहनीय रहा।













