चक्रधरपुर थाना क्षेत्र में पुलिस और श्रम विभाग की संयुक्त टीम ने तत्परता दिखाते हुए मानव तस्करी के एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया है। शहर के प्रसिद्ध होटल केटू में अचानक की गई छापेमारी के दौरान तस्करों के चंगुल से 30 महिला-पुरुष मजदूरों और 6 नाबालिग बच्चों को सुरक्षित मुक्त कराया गया। इन सभी को कथित रूप से बंधुआ मजदूर बनाकर अवैध तरीके से गुजरात ले जाने की तैयारी चल रही थी।
मौके से पुलिस ने इन मजदूरों को ले जाने के लिए खड़ी राजलक्ष्मी ट्रेवल्स की एक बस को भी जब्त कर लिया है।इस बड़ी कार्रवाई की शुरुआत पोड़ाहाट अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी को मिली एक गुप्त सूचना से हुई। सूचना में बताया गया था कि होटल केटू में कुछ तस्कर नाबालिगों और मजदूरों को बंधक बनाकर रखे हुए हैं। मामला गंभीर होने के कारण जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा), श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी, कर्रा सोसाइटी फॉर रूल एक्शन और चाइल्डलाइन को तुरंत अलर्ट किया गया। इसके बाद वरीय पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर सहायक पुलिस अधीक्षक सह अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी के नेतृत्व में एक विशेष छापेमारी टीम बनाई गई।गठित टीम ने चक्रधरपुर थाना प्रभारी अवधेश कुमार और श्रम विभाग के अधिकारियों के साथ मिलकर होटल केटू की घेराबंदी की और अचानक दबिश दी। पुलिस को देखते ही होटल में खलबली मच गई।
टीम ने वहां से कुल 36 लोगों को रेस्क्यू किया, जिनमें 5 लड़के और 1 लड़की समेत 6 नाबालिग शामिल हैं। बाल कल्याण समिति चाईबासा के निर्देश पर सभी नाबालिग बच्चों को सुरक्षित संरक्षण और काउंसलिंग के लिए चाइल्डलाइन को सौंप दिया गया है।पुलिस ने मौके से गुजरात के मोरवी क्षेत्र के रहने वाले दो कथित मानव तस्करों को भी गिरफ्तार किया है, जिनकी पहचान निकुंज गोविन्द बोरसानिया और कादिवार निलेश भाई जेयेन्द्र भाई के रूप में हुई है। इस सनसनीखेज मामले को लेकर चक्रधरपुर थाने में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023, किशोर न्याय अधिनियम और बाल श्रम अधिनियम की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है। दोनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है, और पुलिस अब इस रैकेट से जुड़े अन्य सफेदपोशों की तलाश में जुटी है।
