रांची प्रेस क्लब में शुक्रवार को केंद्रीय सरना समिति सहित विभिन्न आदिवासी व जनजाति सामाजिक संगठनों ने एक संयुक्त प्रेस वार्ता आयोजित कर चर्चों में करम पर्व मनाए जाने पर कड़ा विरोध दर्ज कराया। आदिवासी प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि गिरजाघरों में बालू के टीन में करम डाल (करम देवता) को गाड़कर पारंपरिक विधि-विधान और आस्था का अपमान किया जा रहा है, जिसे समाज किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगा।
संगठन के नेताओं ने कुछ पुस्तकों के संदर्भों का हवाला देते हुए कहा कि वैटिकन परिषद के निर्देशों की आड़ में पारंपरिक आदिवासी त्योहारों को ईसाई विधि से मनाने का प्रयास किया जा रहा है। प्रतिनिधियों का कहना है कि मतांतरण के बाद जब पारंपरिक रूढ़ि, प्रथा और पूजा पद्धति छूट जाती है, तो फिर आदिवासी त्योहारों को नए ढंग से ढालना केवल पहचान बनाए रखने का दिखावा है। इसके साथ ही उन्होंने करम पूजा और उसके पारंपरिक सामूहिक नृत्य-संगीत को लेकर की गई आपत्तिजनक टिप्पणियों पर भी गहरी नाराजगी जताई।
इस पूरे विवाद को लेकर संगठनों ने 16 सितंबर को रांची के उपायुक्त को ज्ञापन सौंपकर इस तरह के आयोजनों पर रोक लगाने की मांग की है। प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि ईसाई समुदाय अपने पर्व मनाने के लिए स्वतंत्र है, लेकिन यदि आदिवासी पहचान के तहत पारंपरिक त्योहारों के मूल स्वरूप से छेड़छाड़ होगी, तो इसका पुरजोर विरोध किया जाएगा। इस प्रेस वार्ता में केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष बबलू मुंडा, प्रधान महासचिव अशोक मुंडा, मुख्य पहान जगलाल पहान, जनजाति सुरक्षा मंच के संदीप उरांव, डॉ. बिरसा उरांव, झारखंड आदिवासी सरना विकास समिति के अध्यक्ष मेघा उरांव सहित कई सामाजिक प्रतिनिधि मौजूद रहे।











