राजधानी रांची में जमीन विवाद से जुड़ा एक संवेदनशील मामला अब पुलिस महकमे से निकलकर सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंच चुका है। रांची पुलिस मुख्यालय-एक में पदस्थापित डीएसपी अमर कुमार पांडे के खिलाफ आदिवासी समन्वय समिति ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को औपचारिक शिकायत पत्र सौंपकर पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। समिति के संयोजक लक्ष्मी नारायण मुंडा ने अपनी शिकायत में डीएसपी की भूमिका, उनके स्थानांतरण और भूमि विवादों में कथित संलिप्तता को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
इसके उलट, डीएसपी अमर कुमार पांडे ने शिकायतकर्ता पर ही पलटवार करते हुए बेहद संगीन आरोप लगाए हैं। डीएसपी का स्पष्ट कहना है कि शिकायत करने वाले लक्ष्मी नारायण मुंडा खुद अवैध जमीन कारोबार में लिप्त हैं और उनके खिलाफ कांके थाने में रिम्स-दो भूमि विवाद सहित कई आपराधिक प्राथमिकी दर्ज हैं। पुलिस के अनुसार, हाल ही में मुंडा और कृष्णा नायक द्वारा बुकरू स्थित शारदा ग्लोबल स्कूल के पास एक भूखंड पर कब्जे की कोशिश की गई थी, जिसे पुलिस बल ने मौके पर पहुंचकर विफल कर दिया था।
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, चर्चित रिम्स-दो भूमि मामले में लक्ष्मी नारायण मुंडा पर सरकारी कार्य में व्यवधान डालने, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, दंगा भड़काने तथा ड्यूटी पर तैनात पुलिस और दंडाधिकारी पर जानलेवा हमला करने जैसे संगीन आरोप शामिल हैं। पुलिस का दावा है कि जांच में इन आरोपों की पुष्टि हो चुकी है और मुंडा गिरफ्तारी की आशंका से फिलहाल फरार चल रहे हैं। इसी क्रम में कांके अंचल और स्थानीय थाने की ओर से आदिवासी व भुईंहरी जमीन पर अवैध कब्जे के मामलों में बीएनएसएस की धारा 163 के तहत निरोधात्मक कार्रवाई भी अमल में लाई गई है।
एक तरफ जहां आदिवासी समन्वय समिति पुलिस पदाधिकारी की कार्यशैली पर सवाल उठाकर निष्पक्ष जांच की मांग कर रही है, वहीं पुलिस प्रशासन शिकायतकर्ता की आपराधिक पृष्ठभूमि और दर्ज मुकदमों का हवाला देकर इसे जांच को भटकाने की साजिश बता रहा है। ऐसे में पूरे विवाद का असली सच क्या है और लगाए गए आरोपों में कितना दम है, यह अब मुख्यमंत्री स्तर से होने वाली संभावित कार्रवाई और निष्पक्ष जांच के बाद ही साफ हो पाएगा।









