रांची: नामकुम अंचल में जमीन से जुड़े म्यूटेशन दस्तावेजों के गायब होने के मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने सख्त कदम उठाते हुए प्राथमिकी दर्ज कर ली है। झारखंड हाईकोर्ट के निर्देश पर हुई इस कार्रवाई में नामकुम की तत्कालीन अंचलाधिकारी (सीओ) श्वेता वर्मा, अंचल निरीक्षक (सीआई) मनोज कुमार और लिपिक दीपक कुमार को नामजद किया गया है। एसीबी ने जस्टिस राजेश शंकर की अदालत में शपथ पत्र दाखिल कर प्राथमिकी दर्ज किए जाने की आधिकारिक जानकारी दी। अदालत ने एसीबी की रिपोर्ट को रिकॉर्ड पर लेते हुए इस संबंध में चल रही अवमानना याचिका को निष्पादित कर दिया।
यह पूरा मामला प्रार्थी थॉमस साइमन सायरिल हंस की ओर से दायर अवमानना याचिका से जुड़ा है। प्रार्थी ने अदालत को बताया था कि एकल पीठ के स्पष्ट आदेश के बावजूद नामकुम अंचल द्वारा उनकी जमीन के म्यूटेशन से जुड़े मूल राजस्व अभिलेख और प्रमाणित प्रति उपलब्ध नहीं कराई जा रही है। मामले में पहले कैबिनेट सेक्रेटरी से अनुमति मिलने के बाद एसीबी ने प्राथमिक जांच (पीई) शुरू की थी, जिसमें प्रथम दृष्टया अंचल के अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत और गड़बड़ी सामने आई। इसके बाद अदालत ने एसीबी को नियमित प्राथमिकी दर्ज कर कानूनी कार्रवाई का आदेश दिया था। मामले में एसीबी की ओर से सीनियर स्टैंडिंग काउंसिल सुमित गाड़ोदिया और प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता जेजे सांगा ने पक्ष रखा।












