झारखंड के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में एडमिशन घोटाले को लेकर सीआईडी (CID) की जांच शुरू होते ही प्रशासनिक हलकों में भारी खलबली मच गई है। सीआईडी की दो टीमों ने रिम्स परिसर के डेटा सेंटर, डीन कार्यालय और प्रशासनिक शाखा में धावा बोलकर कई महत्वपूर्ण फाइलों और डिजिटल रिकॉर्ड को अपने कब्जे में ले लिया है।
इस बड़ी कार्रवाई के बाद से ही रिम्स निदेशक के इस्तीफे को लेकर कयासों का दौर शुरू हो गया है, हालांकि आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं हुई है।यह पूरी जांच मुख्य रूप से दो बड़े मामलों पर केंद्रित है। पहला मामला साल 2025 के शैक्षणिक सत्र में फर्जी जाति और दिव्यांगता प्रमाण पत्र के आधार पर एमबीबीएस (MBBS) की तीन और बीडीएस (BDS) की एक सीट पर अवैध दाखिले से जुड़ा है।
दूसरा मामला रिम्स में सफाई कार्य के टेंडर आवंटन में नियमों को ताक पर रखकर चहेती कंपनियों को फायदा पहुंचाने का है। सीआईडी अब इस बात की तहकीकात कर रही है कि इन संदिग्ध दस्तावेजों का समय पर वेरिफिकेशन क्यों नहीं किया गया और छात्र साल भर तक कैसे पढ़ाई करते रहे। जांच में गड़बड़ी की पुष्टि होते ही सीआईडी थाने में एफआईआर (FIR) दर्ज कर जिम्मेदार अधिकारियों पर गाज गिरना तय माना जा रहा है।
यह विवाद ऐसे समय में आया है जब रिम्स निदेशक डॉ. राजकुमार पहले से ही अपने बेटे ऋषभ कुमार की हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन विभाग में ट्यूटर पद पर हुई विवादित नियुक्ति को लेकर घिरे हुए हैं। मार्च 2026 में हुई इस नियुक्ति पर बिना स्वीकृत पद के नियमों के उल्लंघन के आरोप लगे थे, जिसे निदेशक ने पूरी तरह नियमानुकूल बताया था। अब इस नए घोटाले ने रिम्स प्रबंधन की मुश्किलों को और बढ़ा दिया है।