धनबाद जिला कांग्रेस कार्यालय के बंद ताले खुलने की जगी उम्मीद, अभियान समिति ने तेज की अपनी सक्रियता
कोयलांचल धनबाद की राजनीति में पिछले डेढ़ दशक से चर्चा का केंद्र बने धनबाद जिला कांग्रेस कार्यालय के भविष्य को लेकर एक सकारात्मक किरण दिखाई देने लगी है। पिछले पंद्रह वर्षों के लंबे अंतराल से बंद पड़े इस कार्यालय का मुद्दा हाल ही में संपन्न हुई धनबाद जिला परिषद बोर्ड की बैठक में प्रखरता से गूंजा, जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। आठ मई को हुई इस उच्च स्तरीय बैठक के दौरान कार्यालय की वर्तमान स्थिति और इसके संचालन में आ रही बाधाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। इस विमर्श का सुखद परिणाम नौ मई के समाचार पत्रों में भी प्रमुखता से देखने को मिला, जिसमें यह स्पष्ट संकेत दिया गया है कि अब वर्षों से लंबित इस समस्या का स्थायी समाधान निकलने की संभावना काफी बढ़ गई है। जिला परिषद बोर्ड की सक्रियता ने उन तमाम लोगों के भीतर उत्साह का संचार किया है जो लंबे समय से इस कार्यालय को पुनः जीवंत होते देखना चाहते थे।इस महत्वपूर्ण पहल की सफलता के लिए उन सभी कांग्रेसी नेताओं और कार्यकर्ताओं की सराहना की जा रही है जो पर्दे के पीछे रहकर निरंतर इस मुद्दे को प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर जीवित रखे हुए हैं। “धनबाद जिला कांग्रेस कार्यालय खुलवाओ अभियान समिति” ने इस प्रगति का स्वागत करते हुए एक स्वर में यह मांग बुलंद की है कि केवल चर्चाओं से काम नहीं चलेगा, बल्कि जिला परिषद बोर्ड की आगामी बैठक में कार्यालय को पूर्ण रूप से खोलने पर अंतिम और ठोस निर्णय लिया जाना अनिवार्य है। समिति के सदस्यों का मानना है कि पंद्रह वर्षों का लंबा समय एक बहुत बड़ी अवधि होती है और अब इस विषय पर किसी भी प्रकार का विलंब क्षेत्र के कार्यकर्ताओं के मनोबल को प्रभावित कर सकता है।अभियान समिति ने आगामी रणनीति को लेकर अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। बहुत जल्द समिति की एक विशेष बैठक आहूत की जाएगी जिसमें भविष्य की रूपरेखा और आंदोलन की दिशा पर विस्तार से विचार-विमर्श किया जाएगा। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य प्रशासनिक अधिकारियों और संबंधित बोर्ड पर दबाव बनाए रखना है ताकि अगली बैठक में इस मामले का तार्किक अंत हो सके। प्रकाश शर्मा, किशोर कुमार, प्रमोद सिंह चंद्रवंशी, सतीश चन्द्र रजक और अनिल पाण्डेय जैसे प्रमुख चेहरों के नेतृत्व में यह समिति अब आर-पार की लड़ाई के मूड में नजर आ रही है। उनका स्पष्ट कहना है कि यह केवल एक भवन का प्रश्न नहीं है, बल्कि यह जिले की गौरवशाली राजनीतिक विरासत से जुड़ा मामला है। अभियान समिति की बढ़ती सक्रियता और जनसमर्थन को देखते हुए अब जिला प्रशासन और संबंधित विभागों पर भी जल्द निर्णय लेने का भारी दबाव है, जिससे यह प्रतीत होता है कि वह दिन दूर नहीं जब धनबाद जिला कांग्रेस कार्यालय के द्वार एक बार फिर आम जनता और कार्यकर्ताओं के लिए खोल दिए जाएंगे।
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